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आईटीएम यूनिवर्सिटी व जीवाजी यूनिवर्सिटी में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
ग्वालियर-डॉ. राम मनोहर लोहिया ने लोक कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया। वे जहां कहीं भी अन्याय देखते थे उनके अंदर का निर्भीक और न्याय प्रिय विरोधी पन जाग जाता था। अपने 57 वर्ष के जीवन में 18 बार गिरफ्तार हुए। सब कुछ त्यागने का साहस रखने वाले डॉ. लोहिया को भारतीय राजनीति का कबीर कहा जा सकता है। उनके अनवरत संघर्षों के साथ ग्वालियर का नाम भी जुड़ा हुआ है। 1962 के चुनाव में डॉ. लोहिया ने ग्वालियर रियासत की महारानी के खिलाफ सफाई कर्मी सुखो रानी को उम्मीदवार बनाया था। 26 जनवरी 1962 के दिन डाॅ. लोहिया ने कहा था यदि ग्वालियर के लोग सुखो रानी को विजयी बनाते हैं तो यह सामाजिक और आर्थिक क्रांति का श्रीगणेश होगा। यह बात राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कही। वे रविवार को आईटीएम यूनिवर्सिटी के नाद एम्फीथिएटर में आयोजित चौथे डॉ. राम मनोहर लोहिया स्मृति व्याख्यान में बोल रहे थे।
डॉ. लोहिया ने जाति तोड़ सम्मेलन का आयोजन किया। वे कहते थे जाति प्रथा के गंदे कूड़े पर भ्रष्टाचार के कीड़े पैदा होते हैं। उन्होंने सरकारी नौकरियों के लिए अंतरजातीय विवाह को अनिवार्य बनाने की सलाह दी थी। वे कहते थे मेरी दृष्टि में मेरी कल्पना रामराज्य नहीं बल्कि सीता रामराज्य है। नारी उत्थान से ही समाज आगे बढ़ सकेगा।
लूटने वाला जाएगा, कमाने वाला खाएगा, नया जमाना आएगा: राष्ट्रपति ने कहा कि जिसे अर्थ शास्त्री अंग्रेजी में रेंट सीकिंग एक्टिविटी कहते हैं, उसे समाप्त करने की बात पर डॉ. लोहिया कहते थे लूटने वाला जाएगा, कमाने वाला खाएगा, नया जमाना आएगा। उनका मानना था ऊंची जाति के लोग अपने आपको समाज रूपी जमीन का उर्वरक नहीं बनाएंगे तब तक कमजोर वर्गों के गुलाब नहीं खिलेंगे।
कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदी बेन, हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, उच्च शिक्षामंत्री जयभान सिंह पवैया, नगरीय प्रशासन मंत्री माया सिंह, सांसद डीपी त्रिपाठी मौजूद यह रहे ।
आईटीएम यूनिवर्सिटी के चांसलर रमाशंकर सिंह ने अपने भाषण में कहा कि डॉ. लोहिया ने 1962 के चुनाव में राजमाता के खिलाफ एक मेहतरानी को उम्मीदवार बनाया था। बाद में राष्ट्रपति ने कहा कि सफाई कर्मी को चुनाव लड़ाया था।
जीवाजी यूनिवर्सिटी में राष्ट्रपति ने जेयू दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कहा- पढ़ाई के प्रति ललक हो तो न उम्र बाधा बनती और न विपरीत परिस्थितियां। इसका उदाहरण नीलमणि हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि श्रीमती अग्रवाल का एक बेटा डॉक्टर है व दूसरा इंजीनियर। पति भी डॉक्टर हैं। पढ़ाई की ललक ने उन्हें टॉपर बना दिया।
उन्हाेंने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके माता-पिता गरीब थे, लेकिन डॉ. कलाम ने साइकिल से अखबार बेचकर उच्च शिक्षा प्राप्त की। पहले साइंटिस्ट बने फिर राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम जैसे यदि छात्र मन में ललक रखेंगे तो वह भी सर्वोच्च पद पर पहुंच सकते हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बेटियां बेटों से आगे हैं, जो देश के सुनहरे भविष्य का संकेत हैं। वहीं श्रीमती अग्रवाल का कहना था कि टॉपर बनने के बाद वह ज्योर्तिविज्ञान की छात्रों को नि:शुल्क शिक्षा देंगी।
समारोह में संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा- ग्वालियर अब देश-विदेश में नाम रोशन कर रहा है। यह तानसेन, बैजू बावरा की नगरी तो रहा है और इसे आगे बढ़ाने का काम भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया है। इसके अलावा दिवंगत राजमाता सिंधिया ने इस शहर को पहचान दिलाई है, इसलिए देश-दुनिया में ग्वालियर को सिंधिया की नगरी के नाम से भी पहचाना जाता है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दीक्षांत समारोह में कहा कि शिक्षा के केंद्र कितने भी विशाल क्यों न हो, लेकिन उनकी भी क्षमता होती है। इसलिए ऑनलाइन शिक्षा सुविधाजनक है, इससे छात्र घर बैठे ही शिक्षा ले सकते हैं। भविष्य की टेक्नोलॉजी के संबंध में उन्होंने कहा कि अभी तक व्यक्ति की मदद के लिए इसका उपयोग किया जाता था, लेकिन हमारी निर्भरता टेक्नोलॉजी पर इतनी बढ़ गई है कि हम इसके गुलाम हो गए हैं। उदाहरण के लिए पहले व्यक्ति 10 से 20 टेलीफोन नंबर को याद रखता था, लेकिन आज फैमिली के नंबर के लिए मोबाइल में सर्च करते हैं। यही स्थिति रही तो रोबोट हमें चलाएंगे। (Updated on February 11th, 2018)


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