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सबसे मजबूत राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली है:
नई दिल्ली --केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, श्री राधा मोहन सिंह ने “दक्षिण एशिया और चीन में खाद्य और पोषणिक सुरक्षा बढ़ाने के लिए कार्यनीतिपरक सहभागिता” पर पांचवीं क्षेत्रिय समन्वय बैठक के लिए दक्षिण एशियाई और अफ्रीकी राष्ट्रों के इस सम्मानीय सम्मेलन में भाग लेने पर खुशी जताई। इस सम्मेलन में अफगानिस्तान, भूटान, बांग्लादेश, चीन, इथोपिया, मिस्त्र, भारत, मोरक्को, मिस्त्र, नेपाल, पाकिस्तान और सूडान के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इस सम्मेलन में विकास के लिए कृषि अनुसंधान में दक्षिण- दक्षिण सहयोग पर चर्चा होगी। यह सम्मेलन एनएएससी परिसर, पूसा, नई दिल्ली में हो रहा है।
श्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि इस मंच से सदस्य देशों को अपने क्षेत्र के साथ ही वैश्विक रूप से भूख और गरीबी को दूर करते हुए खाद्य और पोषनिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुन:पुष्टी करने का अवसर प्राप्त होगा।
श्री सिंह ने कहा कि कृषि में भारत की सामर्थ्य बहुत अधिक और विविध है। हम गर्व से कह सकते हैं कि हमारे पास विश्व की सबसे मजबूत राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली है। भौगोलिक रूप से, हमारे पास दूसरा सबसे बड़ा कृषि योग्य भू-क्षेत्र है और 127 से भी अधिक विविध कृषि जलवायु क्षेत्र है जिससे फसलों की संख्या की दृष्टि से भारत वैश्विक रूप से नेतृत्व कर सकता है। उन्होंने कहा कि हम चावल, गेहूं, मछली, फल और सब्जियों के उत्पादन की दृष्टि से विश्व में दूसरे स्थान पर हैं। भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश भी है। यहां तक कि पिछले दशक में हमारे बागवानी क्षेत्र में भी 5.5 प्रतिशत वार्षिक की औसत विकास दर प्राप्त हुई है।(Updated on December 5th, 2017)