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पूर्व सांसदों को मिलते रहेंगे पेंशन,भत्ते

नई दिल्ली 1सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सांसदों को पेंशन और यात्र सुविधा देने का विरोध करने वाली याचिका सोमवार को खारिज कर दी। गैरसरकारी संगठन लोक प्रहरी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले से सहमति जताई है, जिसमें कहा गया था कि पूर्व सांसदों को पेंशन पर कानून बनाने का संसद को अधिकार है। वह इस बारे में कोई भी शर्त लगा सकती है।
न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर और एसके कौल की पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि सातवीं अनुसूची की प्रथम सूची की प्रविष्टि 73 में सांसदों को भत्ते की बात कही गई है। इसका बहुत व्यापक अर्थ है। इसमें सांसदों और पूर्व सांसदों को पेंशन व अन्य सुविधाएं देने की बात शामिल है। कोर्ट ने कहा कि संविधान मे कुछ संवैधानिक पदों के लिए पेंशन की बात कही गई है और अन्य के लिए नहीं कही गई है। इसका यह मतलब नहीं निकलता कि संविधान जिस बारे में चुप है, उसकी मनाही करता है।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता एसएन शुक्ला की इस दलील को खारिज कर दिया कि पेंशन राज्य के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद मिलती है। सांसद कर्मचारी नहीं हैं इसलिए सरकार उन्हें पेंशन नहीं दे सकती। कोर्ट ने कहा कि पेंशन के बारे में यह गलत धारणा है। अन्य भुगतान भी होते हैं जिन्हें पेंशन कहा जाता है जैसे वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन आदि। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि ये सुविधाएं तर्कसंगत हैं कि नहीं यह तय करना संसद का काम है। वह भी इस स्थिति में जबकि कुछ सांसदों की आर्थिक स्थिति काफी अच्छी हो और लाखों की जनसंख्या गरीब हो। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने पूर्व सांसदों को पेंशन और अन्य सुविधाएं दिए जाने को सही ठहराते हुए कहा था कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी उन्हें सम्मान से जीवन जीने के लिए यह जरूरी है। हालांकि, याचिकाकर्ता ने कहा था कि ज्यादातर सांसद पैसे वाले हैं उन्हें पेंशन और अन्य सुविधाएं नहीं मिलनी चाहिए।(Updated on April 16th, 2018)


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