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Detailed Discussion Forum
देश के साथ अपने विकास के लिए राष्ट्रवादी विचारधारा जरूरी

देश की आजादी का 75वां वर्ष देश मनाने जा रहा है। बीते वर्षों में हमने कितनी प्रगति की? क्या खोया और क्या पाया इसका अवलोकन देश के विकास के लिए जरूरी है। देश में आतंकवाद, जबरिया धर्म परिवर्तन और पाकिस्तान से सहानुभूति रखने के कारण हिंदुस्तान का मुस्लिम ’हाशिये’ पर क्यों जा रहा है इसी विषय पर देश के विकास के संदर्भ में मध्यप्रदेश से राज्यसभा के सदस्य, प्रसिद्ध चिंतक तथा सुधारवादी विचारक कैलाश सोनी ने अपने विचार व्यक्त किए।

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आज जो देश में परिस्थिति भाजपा के नेतृत्व में वही स्थिति स्वतंत्रता के समय कांग्रेस की थी गांधी जी के नेतृत्व में। जो लोग 1947 में मुहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में पाकिस्तान चले गए थे वो चले गए। लेकिन कई राष्ट्रवादी नेता थे जो राष्ट्रवादी सोच के थे जिनमें मौलाना आजाद, रफी अहमद किदवाई तथा एमसी चावला जैसे कई राष्ट्रवादी नेता थे। इसी राष्ट्रवादिता की लाइन पर कांलतर में कांग्रेस की सरकार को मुस्लिमों को बढ़ाना था लेकिन उसने राष्ट्रवादिता की जगह तुष्टिकरण को महत्व दिया।

आज जो चंद राष्ट्रवादी मुसलमान है वहीे भाजपा के साथ है। मुस्लिमों की इस बात पर हमें कोई आपत्ति नही कि हमारा अर्थात उनका धर्म श्रेष्ठ है। लेकिन आपत्ति इस बात की है कि सिर्फ हमें (मुस्लिम) जीने का हक है। हमें आपत्ति इस बात की है कि दीगर धर्मों को जीने का भी हक नहीं है और इन्हें समाप्त कर दिया जाए। मेरा कहना यही है कि यह लोकतंत्र और भारत में संभव नहीं है। इस विचार के खिलाफ तो पूरी दुनिया में आज आंदोलन चल रहे हैं, इंडोनेशिया इसका उदाहरण है। यह विचार हिन्दुस्तान में भी लाने की जरूरत है कि हमारे साथ जुल्म ज्यादती करने वाले विदेशी मोहम्मद गौरी नादिरशाह अब्दाली और अफजल जिन्होंने हमारे पर अत्याचार करके धर्मांतरण करवाया। देश के मुस्लिम पक्ष को इस दिशा में सोंचने की जरूरत है कि बाबर क्या बाप लगता है। वह आक्रांता थे जिन्होंने हमारे पूर्वजों को धर्मांतरित करवाया। मैं देश के मुस्लिमों से कहना चाहता हॅू कि यह आपका मुल्क है। बाहर से जो तकरीर करने वाले आते हैं उन्हें जबाव दीजिए कि यह हमारा मुल्क है। खुलकर कहिए कि मुल्क में हमने मिलकर आजादी प्राप्त की है। आज मुसलमान हाशिये पर क्यों जा रहा है? इसका जबाव यही है कि देश के भटके मुसलमानों को ठीक रास्ता चुनना पड़ेगा।

हिन्दुस्तान का मुस्लिम युवा क्यों आतंकियों का मोहरा बन रहा है, इस सवाल पर मेरा कहना यही है कि यह इंटरनेशनल साजिश है जिसके लिए फंडिंग की जा रही है। ’एग्रेसिवनेस’ सिर्फ जवानी में मिलती है। इसी का फायदा उठाया जा रहा है। मुस्लिम नौजवानों का फायदा उठाया जा रहा है जिसमें पीएफआई जैसे संगठन शामिल हैं। अभी जो पीएफआई बिहार का मामला सामने आया है वह देश के सामने है। मैं इस बात से सहमत हूंू कि युवा वर्ग में ’एग्रेसिवनेस’ की गति होती है इसीलिए वे युवा वर्ग को चुनते हैं और उन्हें ही ट्रैनिंग देते हैं। बिना पढ़े लिखे, बेरोजगार को चुनकर उनका ’ब्रेनवाश’ किया जाता है। उन्हीं को टारगेट करते हैं। मेरा तो यह कहना है कि पढ़े लिखे, सभ्य और मुल्क के प्रति वफादारी की भावना रखने वाले मुस्लिम नौजवान ऐसा नहीं करते हैं। मुसलमानों का बहुतायात वर्ग अब यह विचार करने लगा है। उनको जरूरत है विचार करने कि हमें कौनसी लाइन चुनना है? आज पूरी दुनिया में देख रहे हैं क्या वहां अमन चैन है? जहां टोटल मुस्लिम पक्ष है वहां क्या हो रहा है? वहां शिया सुन्नियों में संघर्ष हो रहा है। एग्रेसिव विचारधारा वाले मुस्लिमों को यह सोचना चाहिए कि अपने मुल्क को सुरक्षित रखें। मैं यह कहना चाहूंगा कि देश इस वक्त सही दिशा में जा रहा है। सबसे बड़ी ’एकोनामी’ भारत बन रह है। एग्रेसिव मुस्लिम पक्ष को रचनात्मक सोंच और भूमिका की तरफ कदम बढ़ाने ही होंगे।

1947 में देश के बंटवारे के बाद बड़ी संख्या में हिंदू भी पाकिस्तान में रह गए और इसी प्रकार भारत में भी मुसलमान रह गए। यहां के बहुसंख्यक हिंदुओं ने पाकिस्तान में रहने वाली हिंदू आबादी के साथ वैवाहिक रिश्ते नहीं रखे लेकिन भारत में रहने वाले मुस्लिमों ने पाकिस्तान में रहने वाले मुस्लिमों के साथ रिश्ते रखे। कई बार रिश्तों की आड़ में हमारे देश में पाकिस्तान से आतंकवाद प्रवेश करता रहा है इस सवाल पर मैं यह कहना चाहूंगा कि हिंदुस्तान का मुसलमान क्यों पाकिस्तान के साथ संबंध बनाकर रखना चाहता है? क्या मुस्लिम लड़कियों और लड़कों की शादी के लिए हिन्दुस्तान में कमी है? मेरा कहना यही है कि यह एक इंटरनेशनल ’कानप्रेंसी’ है। लव जिहाद इसी का उदाहरण है। टारगेटिंग करके संबंध बनाते हैं।

हमारे में बुनियादी कमी या अच्छाई यह है कि हम मंे उदारता के गुण ज्यादा हैं। इतिहास उठाकर देखिये दुनिया में से काई भी आया उसे हमने पूरी उदारता से स्वीकार किया। इसके कारण हमारे यहां सहजता से उन्हंे गुजाइयश मिल जाती है। हम दिल खोलकर सभी से सबंध बनाते हैं इसलिए गुंजायश बनती है। बाकी की जगह चाहे पाकिस्तान हो या दीगर मुल्क वहां संकोच है। इसलिए वहां उनके संबंध बन ही नहीं पाते हैं। हमारा जो अति उदारवादी पक्ष है वहीं हमारा आलोच्य पक्ष है।

आज बहुसंख्यक आबादी में सद्भावना उत्पन्न करने का जिम्मा मुस्लिम पक्ष का ज्यादा है। आज यह सोचने की जरूरत है कि यह मुल्क हिंदुओं के साथ हमारा भी है। अगर आप 1947 में देश में रूक गए थे तो इस देश को अपना मुल्क मानकर ही रूके थे। इसलिए सद्भावना पैदा करने की उनको जरूरत है। अगर पाकिस्तान से रिश्ते रखना है तो यह ’टालरेबल’ नहीं है। अगर पाकिस्तान से रिश्ते रखना है और अगर पाकिस्तान के हितों का संरक्षण यहां करोगे तो ’हाशिये की रफ्तार’ रूकनी नहीं है। अब हमारे यहां चेतना बढ़ रही हैं। बहुसंख्यक समाज में कभी कम्युनल सोंच नहीं रही। हिंदू कभी ’कम्युनल’ नहीं रहा। इतिहास गवाह है कि हमने अपने विस्तारवाद या धार्मिक विस्तारवाद के लिए कभी किसी का दिल नहीं दुखाया। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि दूसरे लोगों को गुंजायश मिलती गई। अगर इस मुल्क में किसी को रहना है तो पाकिस्तान उनका ’अभिष्ट’ नहीं हो सकता। पाकिस्तान की तरफ जो देखेगा वह ’टालरेबल’ नहीं हैं। यह देश स्वीकार नहीं करेगा। सभी को स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम बधाई। जय हिंद!