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26 जनवरी 1950 ई॰ को डा॰ भीमराव अंबेदकर द्वारा बनाया संविधान पूर्णरुपेण लागू करते समय तत्कालीन भारत की परिस्थितियों एवं वर्तमान परिस्थितियों में काफी अन्तर आ चुका है ।
सन् 1947 में एक नये पथ का पथिक बना ‘भारत’ , आज सन् 2018 में प्रगति के पथ पर अग्रसर, निरन्तर सफलता के सोपान चढ़ता ‘भारत’ विश्व पटल पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कर रहा है । शिक्षा के माध्यम से हमारे संविधान में शामिल कर्त्तव्यों एवं अधिकारों से प्रत्येक भारतवासी को अवगत कराया जाता रहा है ।
समाज की मजबूती ही गणतंत्र की मजबूती है । जिस समाज के लोगों को गणतंत्र को पर्याप्त जानकारी न हो, उनसे गणतंत्र की मजबूती को अपेक्षा कैसे की जा सकती है । अतः वर्ष 2018 में यह प्रयास किया जाना चाहिये कि प्रत्येक भारतवासी को अपने संविधान की पर्याप्त जानकारी हो तथा सुदृढ़ राष्ट्र के निर्माण के लिये हरेक देशवासी को ‘भारतीयता’ का सही अर्थ पता होना चाहिये ।
हमारी भारतीयता हमारे मूल्यों में निहित है। कहीं न कहीं हमारी भावी पीढ़ी इन मूल्यों से विमुख होती जा रही है । अतः वर्ष 2018 में सर्वप्रथम प्रत्येक शिक्षाविद को शिक्षा के साथ साथ मूल्यों की लौ को भी प्रज्ज्वलित करना होगा। यह हमारे गणतंत्र की सुदृढ़ता के लिये अति अनिवार्य है।
भावी पीढ़ी में विचारों को भी समझा जाये तथा यथायोग्य युवा पीढ़ी से विचार-विमर्श करके भारतीय संविधान में संशोधन किये जाये । हम सभी को ऐसे ‘मूल्यों’ का पालन करना चाहिये जो हमारी अपनी धरोहर के रुप में सभी के लिये परिहार्य हो । सभी नागरिक उन मूल्यों का पालन भी कर सके, ऐसा वातावरण भी तैयार किया जाना आवश्यक है ।
अतः प्रत्येक भारतवासी इस बात के लिये कृत संकल्प रहे कि हम अपनी पुरातन सभ्यता व संस्कृति को और भी प्रफुल्लित करने के लिये सद्मूल्यों का स्वयं पालन करेंगे तथा जन-जन में प्रचार प्रसार भी करेंगे। एक-एक व्यक्ति से बना हुआ यह समाज ‘मूल्यवान’ होकर ही एक सुदृढ़, सशक्त, समाज बन सकेगा । अतः वर्ष 2018 में हमें अपने गणतंत्र की मजबूती के लिये समाज में मूल्यों की मजबूती की ओर ध्यान देना चाहिये ।

JAI HIND!

पूनम बाला
सहायक शिक्षिका
प्रताप कॉलेज ऑफ ऐजूकेशन,
लुधियाना (Punjab)