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मंत्रिमंडल ने सोलर पीवी मॉड्यूल’
मंत्रिमंडल ने सोलर पीवी मॉड्यूल’ सहित कई प्रस्तावों को मंजूरी दी


नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रिमंडल की बैठक में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के उच्च कुशलता वाले सोलर पीवी (फोटो वॉल्टिक) मॉड्यूल में गीगा वॉट पैमाने की निर्माण क्षमता हासिल करने के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) ‘नेशनल प्रोग्राम ऑन हाई एफिशेंसी सोलर पीवी (फोटो वॉल्टिक) मॉड्यूल’ के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस परियोजना पर 4,500 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके अलावा कई अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ पीआईबी महानिदेशक जयदीप भटनागर ने मत्रिमंडल के निर्णयो ंकी जानकारी संवाददाताओं को दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सोलर क्षमता संवर्धन के लिए मोटे तौर पर आयातित सोलर पीवी सैल्घ्स और मॉड्यूल्स निर्भरता है, क्योंकि घरेलू विनिर्माण उद्योग के पास परिचालन योग्य सोलर पीवी सैल्स और मॉड्यूल्स की सीमित क्षमता थी। नेशनल प्रोग्राम ऑन हाई एफिशेंसी सोलर पीवी (फोटो वॉल्टिक) मॉड्यूल से बिजली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम होगी। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का भी समर्थन करेगा।

उन्होंने बताया कि श्वेत वस्तुओं (एयर कंडीशनर तथा एलईडी लाइट) के लिए उत्पादन से जुडी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) को भी मंजूरी दी गई है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के अनुरूप एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6,238 करोड़ रुपये के बजट-आवंटन के साथ श्वेत वस्तुओं (एयर कंडीशनर तथा एलईडी लाइट) के लिए उत्पादन से जुडी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) को मंजूरी दी है। पीएलआई योजना का प्रमुख उद्देश्य क्षेत्र आधारित अक्षमताओं को दूर करके, बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्था का निर्माण और दक्षता को सुनिश्चित करते हुए भारत में विनिर्माण को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। इसकी रूपरेखा भारत में उपकरणों व कल-पुर्जों के सम्पूर्ण इको-सिस्टम को ध्यान में रखते हुए तैयार की गयी है, ताकि भारत को वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा सके। इस योजना से वैश्विक निवेश आकर्षित करने, बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने और निर्यात में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है।

इसी प्रकार मत्रिमंडल ने भारत और जापान के बीच शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग एवं परस्पर आदान-प्रदान के लिए एक समझौता ज्ञापन पत्र को अंमिम रूप दे दिया। इस समझौता ज्ञापन पत्र के माध्यम से एनएआरएल और आरआईएसएच के बीच अनुसंधान सुविधाओं का उपयोग करते हुए वायुमण्डलीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, समन्वयात्मक वैज्ञानिक प्रयोगोंध्अभियानों और प्रतिमान अध्यनों से संबंधित क्षेत्रों में सहयोग के साथ-साथ वैज्ञानिक विशेष सामग्री, प्रकाशनों और सूचनाओं का आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान बैठकें एवं कार्यशालाएं, संकाय सदस्यों छात्रों एवं अनुसंधानकर्ताओं के आदान प्रदान को जारी रखा जाएगा।(updated on April 7th, 2021)

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